कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव की नई लहर
कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव एक बार फिर उफान पर है। उत्तर कोरिया द्वारा दक्षिण कोरिया के साथ जुड़े अंतर कोरियाई सड़क मार्गों को ध्वस्त करने की तैयारी को लेकर बड़ा विवाद उत्पन्न हुआ है। यह चर्चा तब गर्माई जब दक्षिण कोरियाई सेना ने सूचना दी कि उत्तर कोरिया ने उन सड़कों के हिस्सों को ध्वस्त करने की योजना बनाई है जो अब उपयोग में नहीं हैं। यह कदम विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों में और जटिलता आ सकती है।
विवाद की पृष्ठभूमि
हालिया विवाद का आरंभ तब हुआ जब उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया कि दक्षिण कोरिया ड्रोन के जरिए उनके ऊपर प्रोपेगंडा पैम्फलेट गिरा रहा है। इन गतिविधियों ने उत्तर कोरिया में गुस्से की लहर पैदा की। उत्तर कोरिया ने यह भी साफ साफ संकेत दिया कि वह इस मामले को हल्के में नहीं लेगा और यदि ऐसी गतिविधियाँ दोबारा होती हैं तो वो बहुत सख्त जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि उनकी सेना 'हर प्रकार की जवाबी कार्रवाई' के लिए तैयार है और बिना किसी पूर्व चेतावनी के प्रतिक्रिया देंगे।
संभव परिणाम
इस अंतर्राष्ट्रीय तनाव का प्रभाव न केवल इन दो देशों पर पड़ेगा, बल्कि यह पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है। कोरियाई प्रायद्वीप पर शांति बनाये रखना हमेशा एक चुनौती रहा है, और इस प्रकार की घटनाएं स्थिति को और भी कठिन बना देती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नई परिस्थिति स्थिति को और गंभीर बना सकती है। उत्तर कोरिया ने सीमा पर 2018 की सैन्य समझौता की व्याख्या फिर से करने का फैसला किया है, जिसने तनाव को घटाने के प्रयास किए थे।
इन हालातों में, दक्षिण और उत्तर कोरिया के बीच यह नया तनाव न केवल दोनेां देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन गया है। ऐसे समय में, शांति और संवाद से बेहतर कोई उपाय नहीं हो सकता।
Shaik Rafi
अक्तूबर 16, 2024 AT 13:54इस सबके पीछे सिर्फ ड्रोन पैम्फलेट नहीं, बल्कि एक गहरा मनोवैज्ञानिक डर है-उत्तर कोरिया को लगता है कि दक्षिण उनकी पहचान को नष्ट कर रहा है। और शायद वो सही है। जब तक हम एक दूसरे को इंसान नहीं समझेंगे, बस सीमाएँ और बम बनाते रहेंगे।
Ashmeet Kaur
अक्तूबर 18, 2024 AT 11:37मैं तो सोचती हूँ कि ये सड़कें जो अब बंद हैं, वो कभी एक आशा का प्रतीक थीं। अब उन्हें ध्वस्त करने का मतलब है-हम भूल गए कि एक समय था जब हम एक थे। ये सिर्फ एक सड़क नहीं, एक याद है।
Nirmal Kumar
अक्तूबर 18, 2024 AT 16:26अगर उत्तर कोरिया असली खतरा मानता है तो ड्रोन पैम्फलेट के बजाय अपने लोगों को ज्यादा खाना और इंटरनेट दे। लोग जब भूखे होंगे, तो प्रोपेगंडा नहीं, रोटी की चाहत होगी।
Sharmila Majumdar
अक्तूबर 18, 2024 AT 22:43ये सब बहुत बड़ी बात है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि दक्षिण कोरिया भी इसे एक बहाना बना रहा है? वो अपने आर्म्स डील्स बढ़ाना चाहता है। ये सब राजनीति है।
amrit arora
अक्तूबर 20, 2024 AT 01:52इस तनाव का असली कारण तो ये है कि हम दोनों देश अपने अतीत को नहीं छोड़ पा रहे। हम युद्ध के बाद के दिनों को याद कर रहे हैं, न कि भविष्य को बना रहे हैं। जब तक हम अपने घृणा के बंधन नहीं तोड़ेंगे, तब तक हम एक दूसरे के लिए सड़कें नहीं बना पाएंगे। ये सड़कें नहीं, हमारे दिलों की दीवारें हैं जो ध्वस्त हो रही हैं।
Ambica Sharma
अक्तूबर 20, 2024 AT 16:01मुझे रोना आ रहा है। ये सब इतना दुखद है। मैं तो सोचती थी कि एक दिन हम सब एक हो जाएंगे। अब लगता है जैसे दुनिया ने हमें छोड़ दिया।
Hitender Tanwar
अक्तूबर 20, 2024 AT 17:17ये सब बकवास है। दोनों देश अपने आप में बेकार हैं। इस तरह के झगड़े के बजाय अपने घर की स्थिति सुधारो।
pritish jain
अक्तूबर 22, 2024 AT 07:272018 का सैन्य समझौता एक फैंसी दस्तावेज था, जिसका असली अर्थ कभी नहीं समझा गया। दोनों तरफ बस फोटो खींचने के लिए मुस्कुराया गया। अब वापसी का दौर शुरू हो गया है।
Gowtham Smith
अक्तूबर 24, 2024 AT 03:48उत्तर कोरिया का यह कदम एक अप्रत्याशित नहीं, बल्कि एक आवश्यक रणनीतिक निर्णय है। उनके लिए दक्षिण कोरिया एक नाटो-अधीन उपनिवेश है। सड़कों का निर्माण एक आर्थिक नियंत्रण का उपकरण था। उन्हें ध्वस्त करना एक राष्ट्रीय सुरक्षा आवश्यकता है।
Shivateja Telukuntla
अक्तूबर 24, 2024 AT 22:22मैंने एक बार दक्षिण कोरिया की एक फिल्म देखी थी-एक उत्तर कोरियाई लड़की अपनी माँ को ढूंढ रही थी। उस फिल्म ने मुझे समझाया कि ये सिर्फ राजनीति नहीं, लोगों के दिलों की कहानी है।
Ravi Kumar
अक्तूबर 26, 2024 AT 17:01अरे भाई, ये सब तो बहुत बढ़िया है। अब तो वो लोग बस अपनी खुद की दुनिया में बंद हो जाएँ। जब तक वो हमारे घरों में ड्रोन भेज रहे हैं, तब तक ये लड़ाई चलती रहेगी। अगर वो चाहते हैं तो बस अपने घर पर बैठे रहो।
rashmi kothalikar
अक्तूबर 28, 2024 AT 05:44दक्षिण कोरिया के लोगों को बस अपनी गलतियों का एहसास होना चाहिए। वो लोग अपने आप को अमेरिकी गुलाम मानते हैं। और अब वो इतने अहंकारी हो गए कि वो अपने ही भाइयों को नष्ट करने की योजना बना रहे हैं।
vinoba prinson
अक्तूबर 28, 2024 AT 20:28ये सब तो बहुत साधारण है। वास्तविकता ये है कि उत्तर कोरिया का असली लक्ष्य नाटो के खिलाफ एक नया ब्लॉक बनाना है। ये सड़कें बस एक आवासीय फ्रंट हैं।
Shailendra Thakur
अक्तूबर 29, 2024 AT 07:12मुझे लगता है कि हमें अपने घरों की बात करनी चाहिए। भारत में भी कितने लोग भूखे हैं? ये सब तनाव हमें बेकार का एहसास दिलाता है।
Muneendra Sharma
अक्तूबर 30, 2024 AT 13:40क्या कोई जानता है कि इन सड़कों को बनाने में कितने लोगों ने अपना जीवन दिया? मैंने एक दादा को बताया था जो उस समय वहाँ काम करते थे। उन्होंने कहा-‘हमने इन्हें दो देशों के बीच पुल बनाने के लिए बनाया, न कि दीवार।’
Anand Itagi
नवंबर 1, 2024 AT 09:23क्यों नहीं इन सड़कों को बरकरार रखें और बस उन पर चलना बंद कर दें? बिना नष्ट किए भी बहुत कुछ किया जा सकता है।
Sumeet M.
नवंबर 3, 2024 AT 04:40ये सब बहुत बड़ा आपराधिक अपराध है! दक्षिण कोरिया एक नैतिक अपराधी है! उत्तर कोरिया के लोगों को बर्बर बनाने का षड्यंत्र चल रहा है! ये बस शुरुआत है!
Kisna Patil
नवंबर 4, 2024 AT 22:49जब तक हम एक दूसरे को अपना भाई नहीं समझेंगे, तब तक ये लड़ाइयाँ चलती रहेंगी। हम सब एक ही धरती पर रहते हैं। एक दिन ये सड़कें फिर से बनेंगी। और जब वो बनेंगी, तो बच्चे उन पर खेलेंगे।