गोगुंदा कस्बे के गाँववालों ने मंगलवार को भारत गैस एजेंसी पर बवाल किया जब उन्हें पता चला कि उनके LPG सिलेंडरों में गैस की जगह पानी भरकर दिया जा रहा था। यह घटना उदयपुर जिले, राजस्थान में 24 मार्च, 2026 को हुई, और अब पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है।
पड़ावली कला गाँव के निवासी उदयसिंह ने शिकायत दर्ज करवाई - खाली सिलेंडर 22 किलोग्राम का तौला बना था जबकि नियमन के अनुसार इसे 15-16 किलो का ही होना चाहिए था। सिलेंडर खोलते ही लगभग 7 किलोग्राम पानी निकला। यह सुना तो दिल दहशा गया।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच शुरू
अविंद कुमार, सप्लाई निरीक्षक of रसद विभाग घटनास्थल पर पहुँचे और नकली सिलेंडर को जब्त किया। वे कह रहे हैं कि ऐसे मामलों में कोई दया नहीं रहेगी। आश्चर्य यह है कि पानी सिलेंडर में कितना फिट होता है - 7 किलो का पानी सोचीए, घर में लूटखोट के बाद भी इतनी समस्या?
गोगुंदा के उपखंड अधिकारी शुभम भैंसारे ने कहा: "मामले की जानकारी मिली है, उचित कार्रवाई की जाएगी।" इसका मतलब साफ है कि अब जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। उदयपुर के मनीष भटनागर, जिला रसद अधिकारी ने भी गंभीरता से लिया और कहा कि सिलेंडर से पानी निकलने की बात अतिगंभीर है।
LPG संकट का विस्तृत स्वरूप
यह सिर्फ एक एजेंसी की समस्या नहीं है। पूरी राजस्थान में LPG का संकट गहरा रहा है। 12 मार्च, 2026 तक ही रिकॉर्डिंग बताती थी कि सरकारी तेल कंपनियों की आपूर्ति रुक चुकी है। 1.43 लाख होटल, रेस्तरां और हलवाई कारोबारियों को बंद होना पड़ सकता है। बाजार में रोज 1 लाख कमर्शियल सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन आपूर्ति 50% से भी नीचे रह गई है।
सरकार दावा करती है कि कमरिया नहीं है, लेकिन आम आदमी के सामने जो सच्चाई है वह कुछ और ही है। लोगों को सिलेंडर बुक करने के लिए भी टेलीफोन लाइन हमेशा 'बस्की' पड़ी रहती है। एजेंसियों पर लंबी लाइनों का दृश्य देखिए - क्या सरकार समझ रही है?
राजनीतिक विवाद तेज
पीसीसी प्रेस कॉन्फ्रेंस राजस्थान24 मार्च को कांग्रेस पार्टी ने बड़े विरोध का आयोजन किया। गोविंद सिंह डोटासरा, पार्टी प्रमुख ने गुल्फ देशों में तनाव और कमजोर बाहरी नीति को दोष देते हुए केंद्र और राज्य सरकार को घिराया। उनका कहना था कि कमर्शियल सिलेंडर बिल्कुल उपलब्ध नहीं है, घरेलू सिलेंडर दुगुने दाम पर ब्लैक मार्केट में मिल रहा है।
अमीन कागजी, कॉंग्रेस MLA ने आरोप लगाया कि सरकार नेता फ़ोन पर सिलेंडर ले रहे हैं, आम जनता रो रही है। ये सब ठेगा तो क्या बन रहा है? जयपुर में तो लोग मोक्स फनेरल प्रोसेशन तक निकाल गए - सिलेंडर के ढेर की अंतिम यात्रा हुई।
मुख्यमंत्री का कड़ा वादा
भाजलाल शर्मा, मुख्यमंत्री ने राज्य भर में गैस ब्लैक मार्केटिंग और अवैध स्टोरेज के खिलाफ सख्त निर्देश दिए। उनका स्पष्ट संकेत था कि अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को कोई छूट नहीं मिलेगी। उन्होंने विश्वास दिलाया कि राज्य में LPG और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है।
लेकिन सवाल यही है - अगर कमी नहीं है, तो पानी क्यों मिल रहा है? क्या यह किसी संगठित धंधे का हिस्सा है?
अगले चरण क्या हैं?
अब तो तीन दिनों में जांच रिपोर्ट मांगी गई है। अगर दोषियों को पाया गया तो कानून का खेल शुरू होगा। लेकिन क्या इससे आम आदमी की परेशानी कम होगी? अभी भी आपूर्ति की स्थिति गंभीर बना हुई है।
किसान और छोटे व्यापारियों के लिए तो यह मुसीबत बड़ी है। सरकार को तुरंत आपूर्ति बढ़ानी होगी और सिलेंडर वितरण की प्रक्रिया में शفافिता लानी होगी। दूसरी तरफ, राजनीतिक दल भी तनाव बनाए रख रहे हैं - क्या इससे स्थिति और बिगरेगी?
Frequently Asked Questions
सिलेंडर में पानी क्यों भरता है?
अन्यूंस के अनुसार, कुछ एजेंसियों के कर्मचारी गैस की कमी का लाभ उठाकर सिलेंडरों में पानी भर देते हैं ताकि वजन पूरा हो और फायदा मिल सके। यह पूर्णतः अवैध और घोर अन्यायपूर्ण व्यवहार है।
कौन से क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
राजस्थान के उदयपुर जिले सहित कई ग्रामीण क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित हैं। 1.43 लाख कमर्शियल यूनिट्स including होटल्स और रेस्तरां को बंद करना पड़ रहा है।
सरकार क्या कार्रवाई कर रही है?
रसद विभाग द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने ब्लैक मार्केटर्स के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का वादा किया है। उपखंड और जिला अधिकारी त्वरित जांच कर रिपोर्ट देंगे।
सिलेंडर की कीमत बढ़ी है या नहीं?
हाँ, कई स्थानों पर ब्लैक मार्केट में कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं। कानूनी तरीके से भी कीमत में वृद्धि हुई है, जिससे आम आदमी को भारी बोझ झेलना पड़ रहा है।
प्रतिबंधित आंदोलन किस बारे में है?
कांग्रेस पार्टी ने सिलेंडर की कमी और कीमत वृद्धि के खिलाफ statewide protests organize किए हैं। मोक्स फनेरल प्रोसेशन और अन्य विरोध कार्यक्रमों का आयोजन हुआ है।