जब जोश हजलवुड अपनी हैमस्ट्रिंग की रिहैबिलिटेशन शुरू करने लगे, तो उनके लिए एक नया झटका आ गया — अकिलीज टेंडन में दर्द। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 5 दिसंबर, 2025 को जारी किए गए बयान में इसे 'निम्न स्तरीय समस्या' बताया, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हजलवुड की एशेज 2025-26 के लिए उपलब्धता बरकरार है। यह चोट उन्हें मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में न्यू साउथ वेल्स के लिए विक्टोरिया के खिलाफ खेले गए शेफील्ड शील्ड मैच के दौरान हुई हैमस्ट्रिंग चोट के ठीक होने के बाद आई है। अब वे सिडनी में रिहैबिलिटेशन जारी रख रहे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया को बिना उनके अपने दूसरे टेस्ट मैच के लिए तैयार होना होगा — जो 26 दिसंबर को मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में शुरू होने वाला है।
एक चोट के बाद दूसरी, एक अनुभवी गेंदबाज का दर्द
हजलवुड की यह चोट किसी नए घटनाक्रम की शुरुआत नहीं, बल्कि एक बार फिर दोहराई गई विफलता है। 2022-23 में उन्हें साइड स्ट्रेन हुआ था, फिर जनवरी 2023 में अकिलीज की समस्या ने उन्हें भारत के दौरे से बाहर कर दिया था। 2023-24 में कैल्फ स्ट्रेन ने उन्हें पूरे सीज़न के लिए बाहर कर दिया। ये सब ऐसे समय में हुआ जब वे अपनी फिटनेस को वापस पाने की कोशिश कर रहे थे — आईपीएल 2025 के बाद उन्होंने वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका और भारत के खिलाफ व्हाइटबॉल सीरीज़ में शानदार प्रदर्शन किया था। अब फिर से एक चोट ने उनकी आशाओं को तोड़ दिया।
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का आधिकारिक बयान
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मेडिकल टीम ने कहा: 'जोश हजलवुड ने इस हफ्ते हैमस्ट्रिंग की रिहैबिलिटेशन के दौरान अकिलीज सोरनेस की शिकायत की है। यह एक निम्न-ग्रेड समस्या है और अगले हफ्ते तक उन्हें दौड़ना और गेंदबाजी करना शुरू करने की उम्मीद है।' लेकिन यहाँ कुछ छिपा हुआ है — 'अगले हफ्ते' का मतलब अभी भी एशेज के दूसरे हिस्से में उनकी शामिल होने की संभावना नहीं है। मेलबर्न टेस्ट के लिए वे असंभव लग रहे हैं। सिडनी टेस्ट (3 जनवरी, 2026) के लिए भी उनकी उपलब्धता अब एक बड़ा प्रश्न बन गया है।
पैसिंग क्राइसिस: कम्मिंस भी सीमित, अब्बट भी बाहर
हजलवुड की चोट ने ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी रैंकिंग को और खराब कर दिया है। पैट कम्मिंस, टीम के कप्तान, भी अभी अपनी फिटनेस के बाद वापस आए हैं। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के मुख्य चयनकर्ता जॉर्ज बेली ने कहा, 'कम्मिंस बिस्क्वेट में खेल सकते थे, लेकिन उनकी गेंदबाजी पर सीमाएं रखनी पड़तीं। अब वे बिना किसी सीमा के गेंदबाजी कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक उन्हें बरकरार रखना जरूरी है।' और फिर है शीन अब्बट — न्यू साउथ वेल्स के तेज गेंदबाज, जो भी हैमस्ट्रिंग चोट के कारण बाहर हैं। ऑस्ट्रेलिया के पास अब फिट तेज गेंदबाजों की संख्या इतनी कम है कि उन्हें नए खिलाड़ियों को टेस्ट डेब्यू देना पड़ सकता है।
कोच और चयनकर्ता की चिंता: क्या होगा अगर अब भी कोई चोट लग जाए?
एंड्रयू मैकडॉनल्ड, ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुख्य कोच, पहले हजलवुड के एशेज के अंतिम टेस्ट में आने की उम्मीद जता रहे थे। अब उनकी आवाज़ बदल गई है — 'हम उनके लिए उम्मीदें बनाए रख रहे हैं, लेकिन अब हम अपने विकल्पों को भी तैयार कर रहे हैं।' यह बात एक बड़े संकेत के बराबर है। जब एक कोच अपने अनुभवी खिलाड़ी के लिए बचाव योजना बनाने लगे, तो यह बताता है कि उस खिलाड़ी की उपलब्धता पर गंभीर संदेह है।
एशेज 2025-26 का भविष्य: ऑस्ट्रेलिया का बड़ा चुनौती
इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट सीरीज़ में ऑस्ट्रेलिया के पास अब दो विकल्प हैं — या तो अनुभवी गेंदबाजों को अत्यधिक भार देना, जिससे और चोटों का खतरा बढ़ जाएगा, या फिर नए खिलाड़ियों को टेस्ट डेब्यू देना। अगर हजलवुड और कम्मिंस दोनों लंबे समय तक बाहर रहे, तो ऑस्ट्रेलिया के पास बेहतरीन तेज गेंदबाजी टैंक नहीं रहेगा। इंग्लैंड के पास जैक ली, जॉर्ज बाल्टर और जॉर्ज बेली के बाद अब नए तेज गेंदबाज हैं। ऑस्ट्रेलिया के लिए यह समय न केवल टीम के लिए बल्कि उनके खेल के तरीके के लिए भी एक परीक्षा है।
क्या अब भी हजलवुड वापस आ सकते हैं?
क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अनुसार, हजलवुड अभी भी सिडनी में रिहैबिलिटेशन कर रहे हैं और अगर उनका ठीक होना अच्छा रहा, तो वे सीरीज़ के अंतिम टेस्ट में शामिल हो सकते हैं — जो 7 जनवरी, 2026 को सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर होगा। लेकिन यहाँ एक बड़ा 'लेकिन' है: उनके पिछले तीन सालों के इतिहास में जब भी वे वापस आए, तो उन्हें दूसरी चोट लग गई। एक बार अकिलीज, एक बार कैल्फ, एक बार साइड स्ट्रेन। यह अब सिर्फ चोट नहीं, बल्कि एक बार-बार दोहराई जाने वाली पैटर्न है। उनके लिए बस एक बार ठीक होना नहीं, बल्कि लगातार फिट रहना होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जोश हजलवुड की अकिलीज चोट क्यों इतनी चिंताजनक है?
हजलवुड की अकिलीज समस्या इतनी चिंताजनक है क्योंकि यह उनके पिछले तीन सालों के चोट के बाद फिर से आई है। 2023 में भी उन्हें अकिलीज की समस्या हुई थी, जिसके कारण वे भारत के दौरे और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल से बाहर हो गए थे। यह एक दोहराव है, जो बताता है कि उनकी शरीर की प्रतिक्रिया अभी भी अस्थिर है।
हजलवुड के बिना ऑस्ट्रेलिया की टीम कैसे लड़ेगी?
ऑस्ट्रेलिया के पास अब पैट कम्मिंस और नेथन लियोन के अलावा कोई अनुभवी तेज गेंदबाज नहीं है। अगर कम्मिंस भी थक जाएं, तो टीम को नए खिलाड़ियों जैसे डेनियल स्टेनले या जॉर्ज बेली को टेस्ट डेब्यू देना पड़ सकता है। यह बड़ा जोखिम है, क्योंकि एशेज में तेज गेंदबाजी का बहुत बड़ा योगदान होता है।
क्या यह चोट केवल हजलवुड के लिए है या ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के लिए एक बड़ी समस्या है?
यह सिर्फ हजलवुड की समस्या नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी के लिए एक संरचनात्मक समस्या है। नवीनतम जनरेशन के गेंदबाज अभी अनुभवी नहीं हैं। शीन अब्बट भी बाहर हैं। इसलिए टीम अब एक छोटे से गेंदबाजी टैंक पर निर्भर है — जिसमें कोई रिजर्व नहीं है।
क्या इस चोट के कारण हजलवुड की अंतरराष्ट्रीय कैरियर समाप्त हो सकती है?
अभी तक नहीं, लेकिन यह एक बड़ा संकेत है। 34 साल की उम्र में बार-बार चोटें लेना एक अनुभवी खिलाड़ी के लिए बहुत खतरनाक है। अगर अगले छह महीनों में वे फिर से चोटिल हो गए, तो उनकी टीम के लिए उन्हें रखना असंभव हो सकता है। अब उनकी कैरियर का निर्णय उनके शरीर की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
Arjun Kumar
दिसंबर 6, 2025 AT 03:06असल में हजलवुड को चोट लग रही है या ऑस्ट्रेलियाई बोर्ड उन्हें बाहर रखना चाहता है? ये सब बस एक बड़ा प्लान है ताकि नए खिलाड़ियों को मौका मिले।
RAJA SONAR
दिसंबर 7, 2025 AT 02:13हजलवुड की चोटें उसकी लापरवाही का नतीजा हैं वो खुद को गेंदबाजी के लिए बनाने की बजाय इंस्टाग्राम पर फोटो डालने में ज्यादा व्यस्त है
Mukesh Kumar
दिसंबर 8, 2025 AT 03:26दोस्तों चिंता मत करो हजलवुड ठीक हो जाएंगे उनकी मेहनत और डिसिप्लिन उन्हें हमेशा वापस ला देती है ऑस्ट्रेलिया को बस थोड़ा साहस चाहिए
Shraddhaa Dwivedi
दिसंबर 9, 2025 AT 02:39हम भारतीय दर्शक उनकी चोटों को देखकर दिल दुखाते हैं क्योंकि हम जानते हैं कि एक बड़े खिलाड़ी के लिए शरीर कितना महत्वपूर्ण होता है। उम्मीद है वो जल्दी ठीक हो जाएं।
Govind Vishwakarma
दिसंबर 10, 2025 AT 16:42ये सब बकवास है ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी तो पहले से ही बेकार है अब ये चोटों का नाटक क्यों कर रहे हैं
Jamal Baksh
दिसंबर 11, 2025 AT 15:46क्रिकेट एक खेल है जिसमें शरीर का सम्मान होना चाहिए। हजलवुड के लिए उनके शरीर का सम्मान उनके लिए अपने खेल के लिए सबसे बड़ा दान है। उनकी वापसी की उम्मीद हम सब करते हैं।
Krishnendu Nath
दिसंबर 12, 2025 AT 10:06hazlewood ki chot ka kya hoga kya wo wapas aayenge ya phir cricket australia ko naye players ko dekhna padega
dinesh baswe
दिसंबर 13, 2025 AT 06:23यह सिर्फ एक चोट नहीं बल्कि एक प्रणालीगत विफलता है। ऑस्ट्रेलिया ने तेज गेंदबाजों के लिए लंबे समय तक फिटनेस प्रोग्राम नहीं बनाया। अब जब एक टाइटन गिर गया है तो पूरी टीम झूम रही है।
Boobalan Govindaraj
दिसंबर 14, 2025 AT 20:20भाई चिंता मत करो हजलवुड तो बहुत बड़ा लड़का है वो ठीक हो जाएगा और फिर से बल्लेबाजों को डरा देगा
mohit saxena
दिसंबर 16, 2025 AT 06:11अगर हजलवुड नहीं खेलेंगे तो ऑस्ट्रेलिया के पास कोई नहीं है लेकिन ये नए खिलाड़ी भी अच्छे हैं शायद इसी में एक नया स्टार बन जाए
Sandeep YADUVANSHI
दिसंबर 16, 2025 AT 06:52हजलवुड की चोटें उसकी असली कमजोरी हैं अगर वो अपने शरीर को नहीं समझता तो वो क्रिकेट से बाहर हो जाएगा
Vikram S
दिसंबर 17, 2025 AT 04:12ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी अब बच्चों की खेल की तरह है! हजलवुड चोटिल है? तो क्या? इंग्लैंड के खिलाफ ये लोग बस बेवकूफ बन रहे हैं! ये टीम तो बर्बाद हो गई!
nithin shetty
दिसंबर 19, 2025 AT 01:42क्या हजलवुड की चोटों का कारण उनके वेट ट्रेनिंग का तरीका है या फिर उनकी रिकवरी रूटीन में कमी? इसका विश्लेषण तो कोई नहीं कर रहा
Aman kumar singh
दिसंबर 20, 2025 AT 17:43हम भारतीयों को इस चोट के बारे में खुश होना चाहिए? नहीं। हम खेल के लिए उनकी वापसी की कामना करते हैं। असली खिलाड़ी बनने का मतलब है चोटों के बाद भी वापस आना।
UMESH joshi
दिसंबर 21, 2025 AT 18:47हजलवुड की कहानी एक अधूरी गीत है जिसमें दर्द और आशा एक साथ बह रहे हैं। शायद उसकी चोटें उसके शरीर की आवाज़ हैं जो कह रही हैं कि बस थोड़ा धीरे चलो।
pradeep raj
दिसंबर 22, 2025 AT 14:24एक तेज गेंदबाज के लिए अकिलीज टेंडन की चोट एक बहुत ही जटिल फिजियोलॉजिकल इंटरफेस की विफलता है जिसमें टेंडन फाइबर्स के माइक्रोटेक्चरल डैमेज के साथ-साथ न्यूरोमस्कुलर रिस्पॉन्स की असंगति भी शामिल है जिसका असर लंबे समय तक गेंदबाजी के डायनामिक्स पर पड़ता है।
Vishala Vemulapadu
दिसंबर 24, 2025 AT 11:05ये सब बस बकवास है ऑस्ट्रेलिया के पास तो दो तीन गेंदबाज हैं वो भी चोटिल तो ये क्या बात है जो आजकल हर कोई चोट का नाटक कर रहा है