दिल्ली-एनसीआर मौसम अलर्ट: कई दिनों तक लगातार बारिश, तापमान नीचे और सफर मुश्किल

4 सितंबर 2025
दिल्ली-एनसीआर मौसम अलर्ट: कई दिनों तक लगातार बारिश, तापमान नीचे और सफर मुश्किल

दिल्ली-एनसीआर: कब, कहां और कितनी बारिश

छतरी संभालकर रखिए। दिल्ली-एनसीआर में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहेंगे और कई दौर की बारिश समय-समय पर रफ्तार धीमी करेगी। IMD अलर्ट के मुताबिक 2 से 5 सितंबर के बीच आसमान ज्यादातर बादलों से ढका रहेगा, बिजली चमकने और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश बार-बार होगी।

मंगलवार (2 सितंबर) को दोपहर से शाम के बीच कुछ इलाकों में तेज बौछारें गिरने की संभावना है। दक्षिण-पूर्वी हवा 25 किमी/घंटा तक चल सकती है। इस दिन अधिकतम तापमान 29-31 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, यानी सामान्य से नीचे।

बुधवार (3 सितंबर) को दिल्ली में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश बने रहने के संकेत हैं। अधिकतम तापमान 32-34 डिग्री और न्यूनतम 22-24 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा।

गुरुवार और शुक्रवार (4-5 सितंबर) को बादल घने रहेंगे, बीच-बीच में हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें संभव हैं। तापमान का दायरा लगभग 32-34 डिग्री (अधिकतम) और 23-25 डिग्री (न्यूनतम) के बीच रहेगा। हवा का रुख दक्षिण-पूर्व या उत्तर-पूर्व रहेगा और गति आमतौर पर 20 किमी/घंटा से कम रहेगी।

पूरे सितंबर के लिए विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल्ली में इस महीने 3 से 8 दिन बारिश हो सकती है। तापमान 28 से 35 डिग्री के बीच झूलेगा। बादल और मॉनसून की फुहारें गर्मी से राहत देंगी, लेकिन उमस परेशानी बढ़ा सकती है।

आपके लिए इसका मतलब क्या है? पीक ऑवर में सफर लंबा होगा। गुरुग्राम-एक्सप्रेसवे, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, आईटीओ जैसे हिस्सों में पानी भरने का जोखिम रहता है। गड्ढों और जलभराव वाले अंडरपास से बचें। अगर घर के आसपास निचला इलाका है तो पानी निकासी का इंतजाम पहले से जांच लें।

वायु गुणवत्ता पर भी नजर रखें। बरसात के दौरान धूल दबती है, पर बीच-बीच में नमी और कम हवा चलने से स्थानीय प्रदूषक अटक सकते हैं। एलर्जी या दमा के मरीज अपनी दवाएं साथ रखें।

देशभर का अपडेट: कहां होगी भारी से अति भारी बारिश, क्या होगा असर

मौसम विभाग ने उत्तरी और मध्य भारत के कई हिस्सों के लिए कड़ी चेतावनी जारी की है। 2 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में कहीं-कहीं अति भारी बारिश का जोखिम है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मराठवाड़ा, विदर्भ, कोंकण-गोवा, मध्‍य महाराष्ट्र, पूर्वी-पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी-पश्चिमी राजस्थान में अगले कुछ दिनों तक बहुत भारी बारिश के दौर बन सकते हैं।

गुजरात में 4 से 6 सितंबर के बीच भारी बारिश का दौर रहने की संभावना है, जबकि सौराष्ट्र और कच्छ में 6-7 सितंबर को हालात कठिन हो सकते हैं। इन इलाकों में समुद्री हवाएं तेज होंगी और तटीय जिलों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।

यह सिस्टम क्यों सक्रिय है? मॉनसून ट्रफ पिछले दिनों से सामान्य से दक्षिण की ओर झुकी हुई है और बंगाल की खाड़ी से नमी लगातार उत्तर-पश्चिम भारत की ओर जा रही है। खाड़ी में बन रहे निम्न दबाव के क्षेत्र पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए मध्य भारत और राजस्थान तक नमी पहुंचा रहे हैं। उत्तर भारत की ऊपरी परतों में पश्चिमी विक्षोभ के साथ इन सिस्टम का मेल गरज-चमक और तेज बौछारों की संभावना बढ़ाता है।

बारिश की चेतावनी समझना जरूरी है। आईएमडी के मानक के मुताबिक हल्की बारिश 2.5-15.5 मिमी, मध्यम 15.6-64.4 मिमी, भारी 64.5-115.5 मिमी, बहुत भारी 115.6-204.4 मिमी और अति भारी 204.5 मिमी या उससे अधिक होती है। यानी ‘भारी’ का मतलब है कम समय में काफी पानी, जो पहाड़ों में भूस्खलन और मैदानों में शहरी बाढ़ का कारण बन सकता है।

हिमालयी राज्यों—हिमाचल और उत्तराखंड—में ढलानों पर भूस्खलन, चट्टानें गिरने और नदी-नालों में अचानक उफान की आशंका रहती है। यात्रा से पहले रूट अपडेट जरूर देखें। मैदानों में—दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और पश्चिम यूपी—में अंडरपास, लो-लाइंग पॉकेट और निर्माणाधीन साइटें जलभराव के लिए संवेदनशील हैं। मुंबई-कोंकण और गोवा के तटीय हिस्सों में हाई-टाइड के दौरान समुद्री पानी, बारिश के पानी के साथ मिलकर सड़कों को बंद कर सकता है।

कृषि पर असर भी बड़ा है। सोयाबीन, धान और दालों के खेतों में लगातार पानी भराव से नुकसान हो सकता है। अगले 48-72 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी वाले जिलों में किसान कटाई/गहाई टालें, खेत की मेड़ों को मजबूत करें और निचले हिस्सों से पानी की निकासी सुनिश्चित करें। बागवानी में फल तोड़ने के बाद जाल/नेटिंग से पौधों को सहारा दें।

  • सफर: बारिश के पीक समय (सुबह 8-11 बजे, शाम 5-9 बजे) में निकलना टालें। मेट्रो/पब्लिक ट्रांसपोर्ट को प्राथमिकता दें।
  • सड़क सुरक्षा: पानी भरे हिस्सों में ब्रेक हल्के दबाएं, तेज ब्रेक से फिसलन बढ़ती है। अंडरपास और पुलिया पर गहराई का अंदाजा लगाए बिना आगे न बढ़ें।
  • घर-बिजली: यदि घर में पानी घुसता है तो मेन स्विच तक सुरक्षित पहुंच बनाएं। खुले तार, एक्सटेंशन बोर्ड और जमीन पर पड़े प्लग से दूरी रखें।
  • स्वास्थ्य: भीगने के बाद तुरंत कपड़े बदलें। फंगल इन्फेक्शन, सर्दी-खांसी और डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा बढ़ता है—मच्छर रोधी और सूखा माहौल रखें।
  • वाहन: टायर ट्रेड, वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट जांचें। ईंधन टैंक आधा से कम न रखें—लंबे जाम में फंसे तो दिक्कत होती है।
  • दस्तावेज/इमरजेंसी: पावर बैंक चार्ज रखें। स्थानीय आपदा/ट्रैफिक हेल्पलाइन नंबर सेव कर लें।

दिल्ली-एनसीआर में स्कूल-कॉलेज और दफ्तरों को भी प्लान बी रखना चाहिए। ऑनलाइन क्लास/वर्क-फ्रॉम-होम का विकल्प, सुबह की शिफ्टों का समय थोड़ा आगे बढ़ाना और स्टाफ की रोस्टरिंग बरसाती दिनों में भीड़ घटाती है।

निगरानी कैसे रखें? मोबाइल अलर्ट, शहर की ट्रैफिक पुलिस के अपडेट, और आईएमडी के ताजा बुलेटिन पर नजर रखें। लोकल पूर्वानुमान अक्सर हर 3-6 घंटे में अपडेट होता है, इसलिए प्लान दिन में एक बार नहीं, जरूरत पड़े तो दो-तीन बार रिफ्रेश करें।

बारिश राहत भी है और परीक्षा भी। राहत इसलिए कि तापमान नीचे है और गर्मी नहीं कचोटेगी; परीक्षा इसलिए कि शहर की ढांचागत खामियां ऐसे दिनों में खुलकर सामने आती हैं। सतर्क रहेंगे तो खतरे कम होंगे और सफर भी संभल जाएगा।

12 टिप्पणि

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    Ankit Meshram

    सितंबर 5, 2025 AT 05:12
    बारिश हो रही है, लेकिन गलियों में पानी भरने की समस्या तो बरकरार है। इस बार तो बस डर लग रहा है कि कहीं घर का बारिश का पानी न घुस जाए।
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    Shaik Rafi

    सितंबर 6, 2025 AT 17:52
    बारिश सिर्फ पानी नहीं, बल्कि शहर की अस्थिरता का एक दर्पण है। हम जब तक बाढ़ को बाहरी आपदा समझेंगे, तब तक ये चक्र बरकरार रहेगा। असली समस्या तो हमारी निर्माण की सोच है।
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    Ashmeet Kaur

    सितंबर 7, 2025 AT 07:30
    मैं अपने घर के पास के नाले को देखकर बहुत डर गई। नाले का कीचड़ इतना जमा हो गया कि बारिश में पानी बह नहीं पा रहा था। अगर आप भी नीचे वाले इलाके में रहते हैं, तो अपने घर के आसपास की निकासी जरूर चेक कर लें। ये छोटी बातें बड़ी बचाव कर सकती हैं।
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    Nirmal Kumar

    सितंबर 9, 2025 AT 03:32
    अच्छा हुआ कि IMD ने समय पर अलर्ट दे दिया। मैंने अपने टायर्स की ट्रेड और वाइपर्स चेक कर लिए। अगर हर कोई इतना सावधान रहे, तो बारिश का दिन बर्बाद नहीं होता। बस थोड़ी तैयारी से सब कुछ बदल सकता है।
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    Sharmila Majumdar

    सितंबर 10, 2025 AT 20:23
    आप सब बारिश की बात कर रहे हो, लेकिन क्या किसी ने देखा कि नोएडा एक्सप्रेसवे पर जो गड्ढे हैं, वो तो 2019 से वैसे ही हैं? सरकार तो बस अलर्ट देकर छुटकारा पा रही है। इन गड्ढों को भरने का कोई प्लान है या नहीं?
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    amrit arora

    सितंबर 11, 2025 AT 02:09
    बारिश के इस चक्र को देखकर मुझे लगता है कि हम अपने शहरों को जीवन के साथ नहीं, बल्कि उसके खिलाफ डिजाइन कर रहे हैं। जब तक हम बारिश को एक आपदा नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक प्रक्रिया के रूप में समझेंगे, तब तक ये दुख दोहराएगा। हमें स्थायी जल प्रबंधन की ओर बढ़ना होगा। ये सिर्फ बारिश का मुद्दा नहीं, बल्कि हमारे जीवन का मुद्दा है।
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    Ambica Sharma

    सितंबर 11, 2025 AT 07:12
    मैं तो इस बारिश से बहुत खुश हूँ! गर्मी तो बहुत ज्यादा थी, अब तो बाहर निकलने का मन हो रहा है। बस एक बार बारिश में भीग जाना चाहिए, बिना डरे! आप सब बहुत डर रहे हो, लेकिन जीवन तो जीना है न?
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    Hitender Tanwar

    सितंबर 12, 2025 AT 15:37
    इतना अलर्ट क्यों? बारिश तो हर साल होती है। लोगों को डराने के लिए बस बड़े शब्द बना दिए गए हैं। असली समस्या ये है कि लोग अपनी जिम्मेदारी भूल गए हैं।
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    pritish jain

    सितंबर 13, 2025 AT 19:54
    IMD के मानकों के अनुसार, भारी बारिश 64.5 मिमी से अधिक होती है। दिल्ली में अगले 48 घंटों में कई स्थानों पर यह स्तर पार होने की संभावना है। यह एक आंकड़ा है, जिसे जानकर तैयारी करना जरूरी है।
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    Gowtham Smith

    सितंबर 15, 2025 AT 05:21
    हमारे शहरों का ये अवस्था राष्ट्रीय असफलता है। जब तक हम निर्माण को लाइसेंस देते रहेंगे और नियमों को नज़रअंदाज करते रहेंगे, तब तक बारिश हमारे लिए एक युद्ध ही रहेगी। ये नहीं कि बारिश बुरी है, बल्कि हमारी लापरवाही है।
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    Shivateja Telukuntla

    सितंबर 16, 2025 AT 21:09
    मैंने आज सुबह देखा, गुरुग्राम में एक अंडरपास पर पानी भर गया था। लेकिन किसी ने चेतावनी नहीं दी। अगर ये बारिश शहर की जिम्मेदारी है, तो शहर को भी जवाबदेह बनाना होगा।
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    Ravi Kumar

    सितंबर 18, 2025 AT 20:08
    ये बारिश तो बस एक चेतावनी है-एक चेतावनी कि हमने अपनी जमीन को कितना नष्ट कर दिया है। जब तक हम रास्तों को बनाते रहेंगे, नहीं बनाते नालियों को, तब तक ये दिन आएंगे। लेकिन अगर हम आज से शुरुआत करें, तो कल अलग होगा।

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