बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली पहुंचे, रिश्तों में नई शुरुआत

10 अप्रैल 2026
बांग्लादेशी विदेश मंत्री खलीलुर रहमान दिल्ली पहुंचे, रिश्तों में नई शुरुआत

बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान मंगलवार शाम 7 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली पहुंचे। यह दौरा इसलिए बेहद अहम है क्योंकि फरवरी 2026 में तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद यह पहली बार है जब बांग्लादेश का कोई कैबिनेट मंत्री भारत की आधिकारिक यात्रा पर आया है। इस तीन दिवसीय दौरे का मकसद पिछले कुछ समय से ठंडे पड़े भारत-बांग्लादेश रिश्तों में फिर से गर्माहट लाना और आपसी विश्वास को बहाल करना है।

दरअसल, अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस के अंतरिम शासन के दौरान दिल्ली और ढाका के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। अब जब सत्ता परिवर्तन हुआ है, तो दोनों देश एक नई शुरुआत की कोशिश कर रहे हैं। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जाईसवाल ने इस यात्रा का स्वागत करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं और यह दौरा इस साझेदारी को और मजबूत करेगा।

द्विपक्षीय वार्ता और रणनीतिक मुलाकातों का एजेंडा

दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 8 अप्रैल, 2026 (बुधवार) को होगा, जब हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ विस्तृत चर्चा होगी। यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं होगी, बल्कि इसमें भविष्य के रोडमैप पर बात की जाएगी। रहमान के साथ उनके प्रतिनिधिमंडल में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर भी शामिल हैं।

बात सिर्फ विदेश मंत्री तक सीमित नहीं है। अपनी यात्रा के दौरान खलीलुर रहमान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी शिष्टाचार मुलाकात करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस यात्रा से ठीक एक दिन पहले भारत के बांग्लादेश उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की थी, जो इस दौरे की भारी डिप्लोमैटिक तैयारी की ओर इशारा करता है।

जल विवाद और वीजा संकट: सबसे बड़ी चुनौतियां

अब सवाल यह है कि मेज पर चर्चा के लिए मुख्य मुद्दे क्या होंगे? सबसे ऊपर है जल-बंटवारा समझौता। विशेष रूप से फरक्का जल समझौते के नवीनीकरण पर दोनों देशों के बीच गहन बातचीत होने की उम्मीद है, जो सालों से एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

दूसरा बड़ा मुद्दा वीजा सेवाओं की बहाली का है। जुलाई 2024 से सुरक्षा कारणों के चलते बांग्लादेशी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा निलंबित कर दिया गया था। ढाका अब चाहता है कि भारत इस पर सकारात्मक रुख अपनाए ताकि आम लोगों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति की समस्या भी चर्चा का विषय रहेगी। भारत इस समय पड़ोसी देशों को आपातकालीन ऊर्जा आपूर्ति बढ़ा रहा है, और बांग्लादेश भी इसमें सहयोग की उम्मीद कर रहा है।

क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक समीकरण

यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया के संघर्षों की वजह से वैश्विक व्यवस्था बदल रही है। बांग्लादेशी अखबार 'डेली प्रथम अलो' को दिए एक बयान में रहमान ने स्पष्ट किया, "हम भारत के साथ आपसी सम्मान, गरिमा और साझा हितों पर आधारित सामान्य संबंध चाहते हैं।" (उनका लहजा काफी संतुलित था, जो यह दिखाता है कि वे भारत के साथ टकराव के बजाय सहयोग का रास्ता चुनना चाहते हैं)।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा एक 'टर्निंग पॉइंट' साबित हो सकती है। यूनुस प्रशासन के दौरान जो कड़वाहट आई थी, उसे मिटाकर अब एक स्थायी राजनीतिक संबंध बनाने की कोशिश की जा रही है। भारत के लिए भी यह जरूरी है क्योंकि उसकी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति की सफलता काफी हद तक बांग्लादेश के साथ स्थिर रिश्तों पर टिकी है।

अगला पड़ाव: मॉरीशस और हिंद महासागर सम्मेलन

अगला पड़ाव: मॉरीशस और हिंद महासागर सम्मेलन

नई दिल्ली में अपनी व्यस्तता पूरी करने के बाद, विदेश मंत्री रहमान सीधे मॉरीशस रवाना होंगे। वहां वे 10 से 12 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस मॉरीशस में हिस्सा लेंगे। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के सार्वजनिक राजनय महानिदेशक महबूबुल आलम के अनुसार, भारत यात्रा के बाद इस सम्मेलन में जाना बांग्लादेश की व्यापक क्षेत्रीय कूटनीति का हिस्सा है।

कुल मिलाकर, यह दौरा केवल कागजी समझौतों के बारे में नहीं है, बल्कि यह यह देखने का मौका है कि क्या नई BNP सरकार वास्तव में भारत के साथ अपने संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खलीलुर रहमान की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य फरवरी 2026 में बनी नई BNP सरकार के तहत भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को फिर से स्थापित करना और आपसी सम्मान व गरिमा पर आधारित सामान्य रिश्तों की नींव रखना है। इसमें जल-बंटवारा और वीजा सेवाओं जैसी प्रमुख समस्याओं को सुलझाना शामिल है।

फरक्का जल समझौता चर्चा में क्यों है?

फरक्का जल-बंटवारा समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच पानी के साझाकरण से जुड़ा है। बांग्लादेश लंबे समय से अपने हिस्से के पानी की मांग और समझौते के नवीनीकरण की बात कर रहा है, ताकि उसके कृषि और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को कम किया जा सके।

बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा सेवाओं की क्या स्थिति है?

जुलाई 2024 से सुरक्षा कारणों के चलते बांग्लादेशी नागरिकों के लिए भारतीय टूरिस्ट वीजा निलंबित कर दिए गए थे। इस यात्रा के दौरान बांग्लादेशी प्रतिनिधिमंडल भारत से इन सेवाओं को पूरी तरह बहाल करने का अनुरोध करेगा ताकि पर्यटन और पारिवारिक यात्राएं फिर से शुरू हो सकें।

मोहम्मद यूनुस प्रशासन के दौरान संबंधों में तनाव क्यों आया था?

अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद आए अंतरिम प्रशासन के दौरान कई राजनीतिक और कूटनीतिक मतभेद पैदा हुए। भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी विश्वास में कमी आई, जिसे अब नई सरकार और राजनयिक वार्ताओं के जरिए ठीक करने की कोशिश की जा रही है।

भारत यात्रा के बाद विदेश मंत्री कहां जा रहे हैं?

नई दिल्ली में अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी करने के बाद, खलीलुर रहमान मॉरीशस जाएंगे, जहां वे 10 से 12 अप्रैल, 2026 तक आयोजित होने वाले 'इंडियन ओशन कॉन्फ्रेंस' (हिंद महासागर सम्मेलन) में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व करेंगे।